Dussehra Essay in Hindi | दशहरे पर निबंध

हम इस पोस्ट में लेकर आएं हैं आपके लिए dussehra essay in hindi जो आप अपने होमवर्क के लिए लिख सकते हैं या अपना स्कूल का असाइनमेंट पूरा कर सकते हैं. अगर आप सिर्फ दशहरा के बारे में जानकारी के लिए dussehra nibandh ढूंढ रहे हो तो आप सही जगह पर आए हैं.

Essay on Dussehra Hindi | दशहरा पर निबंध 300 Words

प्रस्तावना | Dussehra Par Nibandh

दशहरा भारत में मनाए जाने वाले सभी बड़े हिंदू त्योहारों में से एक है। इस त्योहार को विजयदशमी के नाम से भी बुलाया जाता है। इस त्योहार को पूरे भारत में मनाया जाता है। दशहरा इसलिए मनाया जाता है क्योंकि उस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। भगवान राम भगवान विष्णु जी का ही एक अवतार माने जाते हैं। रावण को दशानन भी कहा जाता है।

दशहरा हमें यह याद दिलाता है कि अच्छाई की हमेशा बुराई पर जीत होती है। आज के दिन लोग दशहरे के मेले में जाना पसंद करते हैं। इस दिन रावण का एक बड़ा सा पुतला तैयार किया जाता है जिसे एक निश्चित समय पर, जलाया जाता है। रावण जलाने से पहले वहां राम और रावण का युद्ध दिखाया जाता है। इस ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए लोग राम और सीता की आरती उतारते हैं।

दशहरे में रामलीला की प्रदर्शन के साथ-साथ बहुत सारे खाने के स्टाल भी लगाई जाती हैं। यहां कई प्रकार की मिठाइयां और व्यंजन पाए जाते हैं। छोटे बच्चों के लिए कई प्रकार के खिलौने और गुब्बारों की दुकानें सजी होती हैं। इसी तरह दशहरे के मेले में लोग अपनी छोटी-छोटी दुकानें लगाते हैं जिसमें वह अनेक तरह की चीजें बेचते हैं। दशहरे के मेले का आनंद उठाने के लिए लोग बाहर विदेशों से भी हमारे देश में आते हैं।

उपसंहार | Dashara per Nibandh

दशहरा सभी को यह सीख देता है कि हमें हमेशा सच्चाई की राह पर चलना चाहिए। कहानी चाहे कोई भी हो अंत में हमेशा अच्छाई की जीत होती है। भगवान राम ने रावण को उसके बुरे कर्मों का फल दिया। इस त्योहार से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अच्छाई की राह पर चलते रहेंगे तो उसका परिणाम भी अच्छा ही होगा। बुराई की राह पर चलने से अंत में हमें ही दुख मिलेगा।

Dussehra Essay in Hindi | दशहरा निबंध 500 Words

प्रस्तावना (Introduction) | Dussehra Essay in Hindi

दशहरा भारत में मनाया जाने वाला एक जाना माना त्योहार है। यूं तो दशहरा एक हिंदू त्योहार माना जाता है परंतु इसे पूरा भारत मिलकर मनाता है। पूरा देश मिलकर इस त्योहार का आनंद उठाता है, और एकता और अच्छाई की झलक दिखलाता है। दशहरे के दिन दशहरे बनाने वाली जगहों पर बहुत सारी भीड़ पाई जाती है क्योंकि इस त्यौहार का आनंद कौन नहीं लेना चाहेगा। दशहरे को मनाने के पीछे की असली वजह है भगवान राम की रावण पर जीत होना। माता सीता का अपहरण करना रावण का एक दुष्कर्म था। इस दुष्कर्म की सजा के तौर पर भगवान राम ने रावण को मार गिराया था। यह हमारे इतिहास का सबसे बड़ा उदाहरण है कि अच्छाई की जीत हमेशा होती है। फिर चाहे बुराई कितनी ही बड़ी क्यों ना हो अच्छाई के सामने हमेशा छोटी पड़ जाती है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार दशहरा नवरात्रि के दूसरे दिन पर मनाया जाता है। यह अश्विन के महीने में आता है। उस अनुसार दशहरा हमेशा सितंबर या अक्टूबर के महीने में मनाया जाता है। जहां एक तरफ बंगाल में लोग माता दुर्गा को अलविदा कहते हैं वहीं दूसरी तरफ भारत में दशहरा भी मनाया जाता है। दशहरे के ठीक 2 हफ्ते बाद दिवाली का त्यौहार आता है।

पारंपरिक आयोजन | Paragraph on Dussehra in Hindi

दशहरे की शुभ अवसर पर लोग मिठाईयां तैयार करते हैं और एक दूसरे को दशहरे की बधाई देते हैं। सभी लोग मिलकर दशहरे का मेला देखने जाते हैं जिसमें वह रामलीला और रावण दहन का आनंद उठाते हैं। रावण दहन के पुतले के जलने का नजारा आकर्षित और रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है। रावण के पुतले के जलते ही आसमान में आतिशबाजी होती है। आतिशबाजी को देखकर सभी लोगों की आंखें अच्छाई और सच्चाई की वजह से जल उठती है। इस नजारे को देख कर मन में एक अलग ही उत्साह उत्पन्न होता है।

दशहरे का दिन बच्चों के मन में सबसे ज्यादा उल्लास पैदा करता है। सभी बच्चे नए कपड़े पहन कर मेले में जाना पसंद करते हैं और बहुत सारे स्वादिष्ट व्यंजनों का मजा लेते हैं। यह दिन सभी बड़े लोगों को भी खूब भाता है। दशहरे का दिन छुट्टी लाता है जिसमें सभी बड़े लोग अपनी हर रोज की भागदौड़ भरी जिंदगी से दो पल सुकून के जीने आते हैं। इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण दशहरे का मेला और रावण दहन होता है। उसे देखने के लिए सभी शहरों में बहुत सारी भीड़ उमड़ पड़ती है।

उपसंहार | Dussehra Essay in Hindi

आजकल के समय में सभी बच्चे अपने अपने घरों पर एक छोटा गत्ते का रावण बनाना पसंद करते हैं और आसपास के सभी बच्चे और लोग शाम के समय उस रावण को जलाकर दशहरा का आनंद लेते हैं। यह बहुत जरूरी है कि हमें यह पता होगी इस त्योहार को मनाने के पीछे की असली कहानी क्या है? उससे भी ज्यादा जरूरी है उस कहानी को जानने के बाद उसका महत्व और उद्देश्य को समझना।

दशहरे का त्योहार हमें यह समझता है कि बुरे कर्मों का फल हमें कभी सुख और शांति से नहीं जीने देगा। अच्छाई की राह पर चल कर देखें आपका पूरा जीवन संवर जाएगा।

Dashara Per Nibandh | दशहरा पर निबंध 1000 words

प्रस्तावना | Dussehra in Hindi Essay

दशहरा हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। यह त्योहार अश्विन के महीने में शुक्ल पक्ष के दसवें दिन पर मनाया जाता है। दसवां दिन नवरात्रि का आखरी दिन होता है, इस दिन सभी लोग माता दुर्गा की आरती उतारते हैं वहीं दूसरी तरफ रावण दहन का आनंद उठाते हैं। यह त्योहार हमेशा सितंबर से अक्टूबर के महीने के बीच आता है। रामायण की कथा के अनुसार जब रावण ने माता सीता का अपहरण किया था। पहले भगवान राम ने उन्हें शांति संदेश देते हुए यह कहा था कि वह, इज्जत और सम्मान से माता सीता को जाने दे। 

जब रावण ने यह आदेश मानने से इनकार किया। इसके बाद भगवान राम और रावण में एक युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में भगवान राम ने रावण को मार गिराया और माता सीता को उसके जाल से मुक्त करवाया। इसीलिए हिंदू धर्म में इस त्योहार को शांति का प्रतीक माना जाता है।

दशहरा आयोजन | Dussehra Par Nibandh

दशहरे के इस शुभ अवसर पर लोग अपने अपने घरों को सजाते हैं और भगवान राम की आरती उतारते हैं। यह दिन नवरात्रि का आखरी दिन होता है इसलिए इस दिन माता दुर्गा की आरती भी बहुत धूमधाम से उतारी जाती है। इस दिन सभी लोग ईश्वर की आरती उतारते हैं और सब की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। 

आज के दिन लोग नए नए कपड़े पहन कर तैयार होते हैं और बाहर घूमने जाते हैं। उसी के साथ साथ सभी रामलीला का आयोजन भी करते हैं, और जगह-जगह जाकर रामलीला का आनंद उठाते हैं। बुराई पर अच्छाई की जीत को मनाने के लिए लोग अपनी-अपनी घरों में स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हुए खिलाते हैं। रावण के पुतले को जलता हुआ देखना लोगों के मन में एक उल्लास की लहर लाता है। दशहरे के दिन रावण के साथ-साथ कुंभकरण और मेघनाद का पुतला भी जलाया जाता है।

पौराणिक कथा | Dussehra Essay in Hindi

रामायण के अनुसार जब भगवान राम ने अयोध्या छोड़ कर 14 साल का जंगल में वनवास लिया था उस समय रावण साधू का भेष बदलकर माता सीता का अपहरण करने आया और चालाकी से माता सीता का अपहरण करके अपने राज्य लंका में ले गया। इसके पश्चात हनुमान ने रावण की लंका जाकर माता सीता का पता लगाया और उन्हें यह वादा किया कि भगवान राम उन्हें यहां से छुड़ाने जल्दी आएंगे। जब भगवान राम को यह पता चला कि माता सीता रावण की लंका में कैद है, भगवान राम ने सबसे पहले रावण को एक दयालु निवेदन किया कि वह माता सीता को पूरे सम्मान के साथ उनके पास वापस आने दे। रावण का अहंकार इस निर्णय पर भारी पड़ गया और उसने भगवान राम को ऐसा करने से इंकार कर दिया।

अंत में भगवान राम और रावण के बीच एक युद्ध छिड़ गया। यह युद्ध 10 दिन तक चला, जहाँ एक तरफ रावण एक शक्तिशाली दानव था। वहीं दूसरी तरफ भगवान राम के पास वानर सेना और सभी देवताओं का आशीर्वाद और उनकी सच्चाई थी। जिस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया उसी दिन से उस दिन को विजयदशमी का नाम दिया गया।

दुर्गा पूजा

इस दिन को दुर्गा पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का विनाश किया था। महिषासुर एक ऐसा दानव था जिसका सिर एक गाय का था परंतु उसका शरीर एक इंसान का था। महिषासुर ने अपने आतंक से अपने राज्य में सभी लोगों की जिंदगी नर्क बना दी थी। महिषासुर का वध करने के लिए सभी देवता एक हो उठे और उन्होंने अपनी शक्तियों से माता दुर्गा को मनाया। माता दुर्गा के पास बहुत से वरदान और शक्तियां थी। इसके साथ साथ कई सारे शक्तिशाली अस्त्र थे जिनसे वह उस दुष्ट दानव का वध कर सकती थी। अपनी शेर पर सवार मां दुर्गा ने अपनी शक्तियों से और अस्त्रों से महिषासुर से 9 दिन तक लड़ाई लड़ी। अंत में दसवें दिन उन्होंने महिषासुर को मार गिराया। यह 10 दिन देवी की शक्ति के प्रतीक होते हैं।

दशहरा और दुर्गा पूजा दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं, परंतु इन दोनों को मनाने के ढंग अलग अलग हैं। जहां एक तरफ भगवान राम की आरती करते हुए रावण दहन का नजारा देखने को मिलता है। वहीँ दूसरी तरफ माता दुर्गा की आरती उतारी जाती है और सभी औरतें सफेद और लाल संघ की साड़ियां पहन कर एक दूसरे को लाल रंग का गुलाल लगाती है। दशहरे से पहले माता दुर्गा के 10 अवतारों के लिए नवरात्रे मनाए जाते हैं। इन 10 दिनों में माता दुर्गा के सभी 10 अवतारों की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जब माता दुर्गा की मूर्ति को आरती करने के बाद नदी में बहाया जाता है। वह मूर्ति तैर कर वापस कैलाश पर्वत तक जाती है जहां उनका मिलन भगवान शिव से होता है। माता दुर्गा के विसर्जन के समय सभी लोग आरती उतारते हैं और माता दुर्गा से अपनी सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

दशहरे का दिन बहुत शुभ माना जाता है आज के दिन लोग नई वस्तु या नया घर खरीदना बहुत शुभ मानते हैं। जहां लोग एक तरफ एक दूसरे को मिठाईयां खिलाकर दशहरे की बधाई देते हैं, उसी के साथ साथ नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन में एक छोटी कन्याओं की पूजा करते हैं और उन्हें प्रसाद और फल देते हैं। इतने माना जाता है कि छोटी कन्याओं में स्वयं माता दुर्गा और लक्ष्मी का वास होता है।

उपसंहार | Dussehra Essay in Hindi

तुम्हारी यह जिम्मेदारी है कि आने वाले सभी पीढ़ियों को रामायण की कथा के बारे में अच्छे से पता हो। शिव दशहरा मनाना और रावण दहन देखना ही नहीं, हमें इसके पीछे की पूरी कहानी और इस कहानी से मिलने वाले उद्देश्य को जिंदगी भर अपने साथ लेकर चलना चाहिए। दशहरा केवल हिंदू संस्कृति का नहीं बल्कि पूरी भारत की संस्कृति का सबसे अहम् हिस्सा है। इस त्योहार पर खेलने वाले सभी रंग और होने वाली आतिशबाजी पूरी दुनिया को रोशन करती है।

खुद भी दशहरे के असली उद्देश्य से सीख लें और सभी को दें। यह जरूरी है कि हमें अच्छाई और बुराई का महत्व पता हो। इससे हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। आपकी अच्छाई केवल पूरे जग को रोशन नहीं करती बल्कि आपके मन को प्रसन्न करती है और आपकी अंतरात्मा को भी शांति देती है।

अंतिम शब्द

आशा करते हैं आपको हमारे Dussehra Essay in Hindi, dashara per nibandh बहुत पसंद आए होंगे. नीचे कमेंट बॉक्स में हमें अपनी टिप्पणी बताएं. और हमारे इस लेख को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *